शनिवार, 1 अक्टूबर 2022

वटवृक्ष

वृद्ध नहीं वटवृक्ष है वो 

क्यूँ वृद्ध आश्रम के कक्ष है वो


हम जिनकी छाया तले पले 

दिल से हमारे समक्ष है वो 


बोझ नहीं सुरक्षा चक्र है वो 

हर परिवार का फख्र है वो 

स्वाभिमान हमें सिखाया जिसने 

हम भुजा तो शरीर में वक्ष है वो 


अच्छे बुरे का भान है उनको 

इस दुनियाँ का ज्ञान है उनको 

सीखो अभी उम्र है सारी बाकी 

जीवन की हर विधा में दक्ष है वो 


गुलाम जो वृद्धों का सम्मान नही होगा 

तो क्या संस्कृति का विनाश नहीं होगा 

जब पहुँचेगा दरगाह में रब्ब की 

हर फैसले में तेरे पक्ष है वो: गुलाम



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें