मंगलवार, 10 मई 2022

जवान


जवान 

किञ्चित मात्र भी ध्यान न आया 

तुम्हें वीरों की क़ुरबानी का 

रंच मात्र भी लेश नहीं

तुम्हें मरते वीर जवानों का 


खड़े है सीना तान हिमालय में 

जो मातृभूमि की रक्षा को 

कभी न पीछे पैर हटा 

उन अंगद से बलवानों का 


इस धरती के आँचल का रंग 

कही न फीका पड़ जाए 

जिसे रंगने को रक्त बहा है 

इस धरती के दीवानों का 


अब जागो ऐ देश के लोगों

अपना फ़र्ज़ निभाना है 

समय आ गया बड़ा निकट 

करने को उनके सम्मानों का 


जब जब देश पे बिपदा आई 

हम सब मिल साथ खड़े होंगे 

ये वक़्त कर्तव्यों को पूर्ति का 

ये वक़्त नहीं है बहानों का 


हरविंदर सिंह 'ग़ुलाम'

पटियाला, पंजाब 

स्वरचित    

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